धन जोबन और काया नगर की (Dhan Joban Aur Kaya Nagar Ki)

धन जोबन और काया नगर की,

कोई मत करो रे मरोर ॥


क्यूँ चले से आंगा पांगा,

चिता बिच तने धर देंगे नंगा,

एक अग्नि का लेके पतंगा,

तेरे फिर जाएंगे चारो ओर,

॥ धन जोबन और काया..॥


सिराणे खड़ी तेरी माई रोवे,

भुजा पकड़ तेरा भाई रोवे,

पायाँ खड़ी रे तेरी ब्याहि रे रोवे,

जिसने ल्याया बाँध के मोल,

॥ धन जोबन और काया..॥


पांच साथ तेरे चलेंगे साथ में,

गोसा पुला लेके हाथ में,

इक पिंजरी का ले बांस हाथ में ,

तेरे देंगे सर में फोड़,

॥ धन जोबन और काया..॥


शंकर दास ब्राम्हण गावे,

सब गुणियों को शीश झुकावे,

अपणा गाम जो खोली बतावे,

वो तो गया रे मुलाजा तोड़,


धन जोबन और काया नगर की,

कोई मत करो रे मरोर ॥

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कन्हैया ने जब पहली बार बजाई मुरली, सारी सृष्टि में आनंद की लहर दौड़ी

मुरलीधर, मुरली बजैया, बंसीधर, बंसी बजैया, बंसीवाला भगवान श्रीकृष्ण को इन नामों से भी जाना जाता है। इन नामों के होने की वजह है कि भगवान को बंसी यानी मुरली बहुत प्रिय है। श्रीकृष्ण मुरली बजाते भी उतना ही शानदार हैं।

नाचे नन्दलाल, नचावे हरि की मईआ(Nache Nandlal Nachave Hari Ki Maiya)

नाचे नन्दलाल,
नचावे हरि की मईआ ॥

भगतो को दर्शन दे गयी रे (Bhagton Ko Darshan De Gayi Re Ek Choti Si Kanya)

भगतो को दर्शन दे गयी रे,
एक छोटी सी कन्या ॥

है अनुपम जिसकी शान, उसको कहते है हनुमान (Hai Anupam Jiski Shan Usko Kahte Hai Hanuman)

है अनुपम जिसकी शान, उसको कहते है हनुमान,

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