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स्तोत्र

कनकधारा स्तोत्रम् (Kanakdhara Stotram)
कनकधारा स्तोत्रम् (Kanakdhara Stotram)
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्तीभृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्।
अङ्गीकृताऽखिल-विभूतिरपाङ्गलीलामाङ्गल्यदाऽस्तु मम मङ्गळदेवतायाः॥1॥
सुंदरकांड पाठ (भाग 2 ) - दोहा 31-60
सुंदरकांड पाठ (भाग 2 ) - दोहा 31-60
सुंदरकांड रामचरितमानस का सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय भाग है, जिसमें भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि और भक्ति का अद्भुत वर्णन मिलता है। सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से हनुमान जयंती, राम नवमी, मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
हनुमान साठिका (Hanuman Sathika)
हनुमान साठिका (Hanuman Sathika)
हनुमान साठिका भगवान श्री हनुमान जी की महिमा का अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसमें पवनपुत्र हनुमान जी के गुण, बल, भक्ति और उनके चमत्कारी स्वरूप का वर्णन किया गया है। इसका नियमित और विशेष रूप से मंगलवार और हनुमान जयंती के दिन पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
श्री हनुमत्ताण्डवस्तोत्रम् – सम्पूर्ण पाठ (Hanumant Tandav Stotram)
श्री हनुमत्ताण्डवस्तोत्रम् – सम्पूर्ण पाठ (Hanumant Tandav Stotram)
हनुमान जी की उपासना में कई शक्तिशाली स्तोत्रों का वर्णन मिलता है, जिनमें श्री हनुमत्ताण्डवस्तोत्रम् अत्यंत प्रभावशाली और दुर्लभ माना जाता है। यह स्तोत्र हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और पराक्रम का अद्भुत वर्णन करता है। जो भक्त श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करते हैं, उनके जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और आत्मबल में वृद्धि होती है।
संकट मोचन हनुमान अष्टक (Hanuman Ashtak) – सम्पूर्ण पाठ
संकट मोचन हनुमान अष्टक (Hanuman Ashtak) – सम्पूर्ण पाठ
संकट मोचन हनुमान अष्टक आठ पदों (अष्टक) वाला एक स्तोत्र है, जिसमें हनुमान जी के गुणों और उनके द्वारा किए गए महान कार्यों का वर्णन किया गया है। यह विशेष रूप से संकटों से मुक्ति के लिए पढ़ा जाता है। इसमें उनके पराक्रम, भक्ति और संकट मोचन स्वरूप का वर्णन किया गया है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान अष्टक का पाठ करते हैं, उनके जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
श्री हनुमंत स्तवन (Shri Hanuman Stavan) – सम्पूर्ण पाठ
श्री हनुमंत स्तवन (Shri Hanuman Stavan) – सम्पूर्ण पाठ
श्री हनुमंत स्तवन भगवान श्री हनुमान जी की महिमा का वर्णन करने वाली एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तुति है। इसमें हनुमान जी के बल, बुद्धि, भक्ति और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। जो भक्त श्रद्धा से इस स्तवन का पाठ करते हैं, उन्हें हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं।
सुंदरकांड पाठ (भाग 1 ) – दोहा 1-30
सुंदरकांड पाठ (भाग 1 ) – दोहा 1-30
सुंदरकांड रामचरितमानस का सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय भाग है, जिसमें भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि और भक्ति का अद्भुत वर्णन मिलता है। सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से राम नवमी, हनुमान जयंती, मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
श्री हनुमान सहस्रनामस्तोत्रम् (Shri Hanuman Sahastranaam Stotram)
श्री हनुमान सहस्रनामस्तोत्रम् (Shri Hanuman Sahastranaam Stotram)
श्री हनुमान सहस्त्रनाम स्तोत्र भगवान हनुमान जी के हजार पवित्र नामों का दिव्य संकलन है, जिसमें उनके बल, बुद्धि, भक्ति और पराक्रम का वर्णन मिलता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के संकट दूर होते हैं, आत्मबल बढ़ता है और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती के दिन इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
बजरंग बाण (Bajrang Baan) – सम्पूर्ण पाठ हिंदी में
बजरंग बाण (Bajrang Baan) – सम्पूर्ण पाठ हिंदी में
बजरंग बाण भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली स्तोत्र है। इसे संकट मोचन पाठ भी कहा जाता है, क्योंकि यह जीवन के कठिन से कठिन संकटों को दूर करने में सहायक माना जाता है। हनुमान जी की कृपा पाने के लिए भक्त विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को बजरंग बाण का पाठ करते हैं।
दुर्गा सप्तशती दशम अध्याय | शुंभ वध | Durga Saptashati Chapter 10 Hindi
दुर्गा सप्तशती दशम अध्याय | शुंभ वध | Durga Saptashati Chapter 10 Hindi
दुर्गा सप्तशती का दशम अध्याय “शुंभ वध” देवी माहात्म्य का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग है, जिसमें मां दुर्गा और दैत्यराज शुंभ के बीच अंतिम युद्ध का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में देवी यह सिद्ध करती हैं कि संपूर्ण सृष्टि में वही एकमात्र शक्ति हैं और सभी देवियां उन्हीं का स्वरूप हैं। अंततः देवी चंडिका अपने दिव्य पराक्रम से शुंभ का वध करती हैं और धर्म की स्थापना करती हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि अहंकार, अधर्म और अन्याय का अंत निश्चित है। इसका पाठ करने से जीवन में विजय, आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा और देवी कृपा की प्राप्ति होती है। नवरात्रि में इसका जप विशेष रूप से सिद्धि और सफलता प्रदान करता है।
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