नवीनतम लेख

लचकि लचकि आवत मोहन (Lachaki Lachaki Awat Mohan)

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन


मोहन अधर धरत मुरली,

मोहन आधार धरत मुरली,

मधुर मधुर बाजे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन


श्रवण कुण्डल चपल दोलन,

मोर मुकुट चंद्र कलन

श्रवण कुण्डल चपल दोलन,

मोर मुकुट चंद्र कलन


मन्द हसनी, दिया के बसनी,

मन्द हसनी, दिया के बसनी,

मोहन मूरति राजे


लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन


भ्रुकुटी कुटिल कमल नयन,

अधर अरुण, मधुर बैन

भ्रुकुटी कुटिल कमल नयन,

अधर अरुण, मधुर बैन


गति गजेंद्र, चारु तिलक,

गति गजेंद्र, चारु तिलक

भाल पद साजे


लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन


लोचन दास श्याम रूप,

नख शिख शुभ अनूप

लोचन दास श्याम रूप,

नख शिख शुभ अनूप


रस की हूप निरसी वदनि,

रस की हूप निरसी वदनि,

कोटि मदन लाजे


लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन,

आवे मन भावे

लचकि लचकि आवत मोहन

माघ महीने में तुलसी की पूजा कैसे करें?

माघ का महीना हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, वर्ष का दसवां महीना होता है और यह दिसंबर-जनवरी के बीच आता है। माघ का महीना विशेष रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।

कितने साल तक रखना चाहिए एकादशी और प्रदोष व्रत

हिन्दू धर्म में एकादशी और प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। ये व्रत धार्मिक श्रद्धा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ के लिए किए जाते हैं।

हमारे साथ श्री रघुनाथ, तो किस बात की चिंता (Hamare Sath Shri Raghunath Too Kis Baat Ki Chinta)

हमारे साथ श्री रघुनाथ तो
किस बात की चिंता ।

ओम अनेक बार बोल (Om Anek Bar Bol Prem Ke Prayogi)

ओम अनेक बार बोल, प्रेम के प्रयोगी।
है यही अनादि नाद, निर्विकल्प निर्विवाद।

यह भी जाने