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भारत समेत दुनिया भर में महादेव के कई सारे मंदिर हैं, इन मंदिरों में शिव के अलग-अलग स्वरूप हैं जहां उनकी कई तरहों से उपासना होती है। ऐसा ही एक अनोखा मंदिर मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव का दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है जिसे भोजेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। ये मंदिर अपनी अद्भुत कारीगरी और अपूर्ण शिखर की वजह से दुनिया भर में विख्यात है। तो आईए जानते हैं भगवान भोजेश्वर महादेव के नाम पहचाने जाने वाले रायसेन के भोजपुर मंदिर के बारे में …..
भोजेश्वर मंदिर - भोजेश्वर महादेव मंदिर अपने शांत वातावरण, ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। ये मंदिर अपनी शानदार वास्तुकला और जटिल नक्काशी के साथ- साथ अपनी अद्भुत कारीगरी और शिल्प कौशल के लिए शिवभक्तों में हमेशा से ही आस्था का केंद्र बना रहा है।
मंदिर में स्थित है विशाल शिवलिंग
इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक सुंदर शिव मंदिर है जिसे अवश्य देखना चाहिए। यह शिवलिंग आकर में बहुत बड़ा है, मंदिर के प्रांगण में अन्य देवी देवताओं की भी मूर्तियां विराजमान है। जिसमें माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तकेए समेत नंदी जी भी हैं।
मंदिर का लोकेशन
वैसे तो मंदिर मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में है लेकिन राजधानी भोपाल से इसकी दूरी काफी कम है। यदि आप भोपाल आएं है तो यह एक अवश्य घूमने वाली जगह है। यह भोपाल से करीब 1 घंटे की दूरी पर स्थित है। जहां आप कैब, बस, प्राइवेट टैक्सी, बाइक या फिर पर्सनल व्हीकल से आसानी से पहुंच सकते हैं।
मंदिर निर्माण का इतिहास
मंदिर को सुंदर और ऐतिहासिक बनाने में इसके रोचक इतिहास की महत्वपूर्ण भूमिक रही है। इतिहासकारों के अनुसार मध्ययुगीन काल में राजा भोज ने भोजपुर की स्थापना की थी, और इस मंदिर ने पूरे भारत में भोजपुर की प्रतिष्ठा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे भोजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और इसका निर्माण भोजपुर गांव में एक पहाड़ी पर बेतवा नदी के तट पर किया गया था। राजधानी भोपाल से 22 किलोमीटर दूर स्थित ये मंदिर दंसवी-ग्यारहवी शताब्दी के लाल पत्थरों से निर्मित किया गया था। राजा भोज ने 1010 और 1053 ई. के बीच शिवलिंग और मंदिर के निर्माण का आदेश दिया था। हालांकि, कुछ वजहों से मंदिर अधूरा रह गया और अभी तक पूरा नहीं हुआ और इन दिनों भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस मंदिर के रखरखाव और निर्माण का काम देखता है।
इसके अलावा एक स्थानीय किवदंति के अनुसार ये भी कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में पांडवों की भी अहम भूमिका रही है। द्वापर युग में पाण्डव यहां अपने वनवास काल के दौरान आए थे जिन्होंने भगवान शिव की पूजा के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की थी जिस पर आगे चलकर राजा भोज ने मंदिर का निर्माण कराया।
क्यों अधूरा है भव्य मंदिर?
भोजेश्वर मंदिर का एक प्रमुख आकर्षण यह है कि इस मंदिर का शिखर अधूरा है। हालांकि, यह अपूर्ण क्यों है? इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिलता है लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि राजा भोज ने एक ही दिन में मंदिर का निर्माण करने का संकल्प लिया था, लेकिन एक दिन में ये मंदिर पूरी तरह से नहीं बन सका और इसके अधूरा ही छोड़ना पड़ा। जिसके बाद उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए थे। कुछ इतिहासकारों का अनुमान है कि यह प्राकृतिक आपदाओं, अपर्याप्त संसाधनों या युद्ध के कारण यह अधूरा रह गया था।
मंदिर के नाम के पीछे ये है कहानी
मध्य प्रदेश के इस मंदिर को पूर्व का सोमनाथ भी कहा जाता है, इसका नाम इस क्षेत्र के शासक परमार वंश के राजा भोज के नाम पर भोज मंदिर या भोजेश्वर मंदिर भी कहा जाता है ।
मंदिर की वास्तुकला
यह मंदिर भारत में परमार काल के दौरान मंदिर के वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करती है। मंदिर का मुख्य भाग और इसका शिखर मंदिर वास्तुकला की द्रविड़ शैली से प्रभावित हैं। मंदिर की वास्तुकला वास्तव में भव्य है। यह मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है। मंदिर में एक गर्भगृह है, जिसकी छत अधूरी है। एक ऊंचा मंच है जो गर्भगृह के प्रवेश द्वार के पश्चिम की ओर फैला हुआ है। गर्भगृह का प्रवेश द्वार एक विशाल द्वार से होकर जाता है। मंदिर में गर्भगृह के अंदर चार 12 मीटर ऊंचे स्तंभ हैं जो शिखर को सहारा देने के लिए बनाए गए हैं।
भारत के सबसे ऊंचे शिवलिंगों में से एक
भगवान का शिवलिंग बहुत बड़ा है, यह 18 फीट(5.4 मीटर) ऊंचा पत्थर का शिवलिंग 21 फुट ऊंचे (6.4 मीटर) चबूतरे पर बना हुआ है। भोजपुर मंदिर में शिवलिंग की परिधि लगभग 7.5 फुट(2.3 मीटर) है। यह भारत के सबसे बड़े शिव लिंगों में से एक है। आश्चर्य करने वाली बात यह है कि यह मंदिर एक ही पत्थर से बनाए गया है।
मंदिर में पूजा के लिए समय का रखे ध्यान
भोजेश्वर मंदिर सुबह 6 बजे से शाम के 6 बजे तक खुला रहता है। पूजा और दर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं लगता है। पूजा और अनुष्ठान के लिए मंदिर के पंडित पूरा योगदान देते है। हर साल, हजारों भक्त महा शिवरात्रि और श्रावण के सोमवार पर त्योहार मनाने बाबा की पूजा के लिए मंदिर में इकट्ठा होते हैं।
भारत की राजधानी से मंदिर की दूरी
भारत की राजधानी दिल्ली से भोजेश्वर मंदिर की दूरी कुल 825 किलोमीटर के लगभग है। आप दिल्ली से भोपाल तक की यात्रा करके मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते है। भोपाल तक आने के लिए आप ट्रेन या फ्लाइट कोई भी साधन का प्रयोग कर सकते है।
भोपाल शहर के नजदीक होने की वजह से यहां ठहरने की व्यवस्था भी बहुत अच्छी है। भोपाल में कई मशहूर 5 स्टार, 3 स्टार और कम बजट वाले होटल हैं। जहां आप सुविधा पूर्वक ठहर सकते हैं। इसके अलावा भोजपुर शिव मंदिर के पास प्राकृतिक स्थल भीमबैठका भी है, जहां एक दिन में आप आसानी से घूम सकते हैं।
भोजपुर के मंदिर में स्थापित शिवलिंग को एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। यह मंदिर अपूर्ण होते हुए भी अपने आप में पूर्ण और बहुत ही खूबसूरत है। अगर आप मध्य प्रदेश आएं या यहां के रहने वाले हैं तो एक बार इस मंदिर में दर्शन करने अवश्य जाएं। इस मंदिर की भव्यता देख आप स्थापत्य कला के एक आश्चर्य करने वाला उदाहरण के गवाह बन सकेंगे।
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