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24 अक्टूबर को खरीदारी के लिए दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसे ज्योतिष शास्त्र में बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इससे सभी नए कार्यों में सफलता मिलती है। सोना-चांदी, इलेक्ट्रिक, वाहन, भूमि और व्यावसायिक संपत्तियों की खरीदारी इस दिन घर में समृद्धि लाती है। शनि और बृहस्पति के विशेष योग से इस दिन की गई निवेश योजनाएं भी स्थायित्व प्रदान करती हैं। व्यक्तिगत जीवन से लेकर राष्ट्रीय स्तर का 48 मुहूर्तों का पूरा ये पूरा दिवस सकारात्मक उन्नति और स्थायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर इस वर्ष 24 अक्टूबर गुरुवार को गुरु पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ संयोग है। इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। यह विशेष दिन उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो नए कार्यों की शुरुआत या कोई निवेश करने की योजना बना रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ फल देने वाला और समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। इसे खरीदारी का महा मुहूर्त भी कहा जाता है।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, दीपावली से पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से सबसे प्रमुख है। जिसे नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है, जबकि इसका उप स्वामी बृहस्पति है। शनि को कर्म, पुरुषार्थ और काल पुरुष की ऊर्जा का कारक माना जाता है। बृहस्पति ज्ञान, शिक्षा, त्याग और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। इन दोनों ग्रहों के संयोजन से पुष्य नक्षत्र भौतिक समृद्धि के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक है।
इस दिन स्थायी संपत्तियों में निवेश करना भी शुभ माना जाता है। शनि के स्वामी होने के कारण भूमि, भवन या व्यावसायिक प्रतिष्ठान जैसे स्थिर और स्थायी चीजों की खरीदारी का विशेष महत्व है।
गुरु पुष्य नक्षत्र में कई प्रकार के निवेश और खरीदारी बेहद ही शुभ मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन की गई खरीदारी चिरस्थायी लाभ और समृद्धि देती है। खासतौर, पर निम्न चीजों की खरीद को शुभ माना जाता है।
24 अक्टूबर को गुरु पुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जिससे यह दिन और भी खास हो जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग का अर्थ है कि इस दिन शुरू किए गए सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस समय शनि कुंभ राशि में और बृहस्पति वृषभ राशि में गोचर कर रहे हैं। इन ग्रहों का योग पुष्य नक्षत्र के दिन विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। शनि का केंद्र योग स्थायित्व प्रदान करता है। जबकि, बृहस्पति का त्रिकोण योग भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति का कारक है। इस दिन की गई सोने-चांदी, लोहे और वाहनों की खरीदारी शुभ मानी जाती है। इसके साथ ही जमीन, भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान जैसे निवेशों में स्थायित्व और समृद्धि का योग प्रबल होता है।
शनि और बृहस्पति का यह संयोग ना केवल व्यक्तिगत जीवन बल्कि राष्ट्र की विदेश नीति और कूटनीति को भी प्रबल बनाता है। शनि विदेश नीति और कूटनीति का कारक ग्रह माना जाता है।
बृहस्पति ज्ञान, वरिष्ठता और श्रेष्ठता का प्रतीक है। इन ग्रहों के प्रभाव से आने वाले तीन महीनों में भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को मजबूती मिलेगी। भारतीय बाजार को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी, विशेष रूप से पश्चिमोत्तर दिशा और एशिया के मध्य क्षेत्र में इसका विशिष्ट प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।
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