नवीनतम लेख
राम जन्मभूमि पर जाकर,
जीत के दीप जलाएंगे,
कलयुग के रावण अब भय से,
अपनी खैर मनाएंगे ॥
राम अयोध्या जब लौटे,
जले थे दीपक घर घर में,
सियाराम के जयकारे भी,
गूंज उठे थे अम्बर में,
जाके अयोध्या दिवाली में,
फुलझड़िया हम जलाएंगे,
कलयुग के रावण अब भय से,
अपनी खैर मनाएंगे ॥
देश के कोने कोने से जब,
भक्तो की टोली आएगी,
उनकी भक्ति की शक्ति से,
ये दुनिया अब थर्राएगी,
जय श्री राम का झंडा अब तो,
हर घर में लहराएगा,
कलयुग के रावण अब भय से,
अपनी खैर मनाएंगे ॥
राम जन्मभूमि पर जाकर,
जीत के दीप जलाएंगे,
कलयुग के रावण अब भय से,
अपनी खैर मनाएंगे ॥
........................................................................................................'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।