नवीनतम लेख
पूरब से जब सूरज निकले,
सिंदूरी घन छाए,
पवन के पग में नुपुर बाजे,
मयूर मन मेरा गाये,
मन मेरा गाये,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय ॥
पुष्प की माला थाल सजाऊं,
गंगाजल भर कलश मैं लाऊं,
नव ज्योति के दीप जलाऊं,
चरणों में नित शीश झुकाऊं,
भाव विभोर होके भक्ति में,
रोम रोम रम जाये,
मन मेरा गाये,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय ॥
अभयंकर शंकर अविनाशी,
मैं तेरे दर्शन की अभिलाषी,
जन्मों की पूजा की प्यासी,
मुझपे करना कृपा जरा सी,
तेरे सिवा मेरे प्राणों को,
और कोई ना भाये,
मन मेरा गाये,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय ॥
पूरब से जब सूरज निकले,
सिंदूरी घन छाए,
पवन के पग में नुपुर बाजे,
मयूर मन मेरा गाये,
मन मेरा गाये,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय,
ॐ नमः शिवाय ॥
'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।