मने अच्छा लागे से(Manne Acha Laage Se)

सिया राम जी के चरणों के दास बाला जी,

भक्तों के रहते सदा पास बाला जी,

श्री राम जी के दूत बड़े खास बाला जी,

तेरे दम से चले मेरी सांस बाला जी,

तेरा सालासर दरबार तने पूजे यो संसार,

तेरी गूंजे जय जयकार मने अच्छा लागे से,

माता अंजनी के लाल तेरी कोई ना मिसाल,

तेरा चोला लाल लाल मन्ने अच्छा लागे से,

तेरे तन में है राम तेरे मन में है राम,

तन्ने कहना राम-राम मने अच्छा लागे से ॥


मैं तो हो गया था बड़ा मजबूर बालाजी,

चरणों से हो गया था दूर बालाजी,

तेरे नाम का यो चढ़ गया सरूर बालाजी,

तेरी भक्ति से हो या मशहूर बालाजी,

तूने भरदी मेरी गोज तेरी कृपा से मौज,

तेरे दर पे आना रोज मने अच्छा लागे से,

तेरे तन में है राम तेरे मन में है राम,

तन्ने कहना राम-राम मने अच्छा लागे से ॥


तेरे ऊंचे ऊंचे देखूं जो निशान बाला जी,

दिल में जगे सै अरमान बाला जी,

तूने भर दी मेरी गोज तेरी कृपा से मौज,

तेरे दर पे आना रोज मने अच्छा लागे से,

तेरे तन में है राम तेरे मन में है राम,

तन्ने कहना राम-राम मने अच्छा लागे से ॥


तेरे ऊंचे ऊंचे देखूं जो निशान बाला जी,

दिल में जगे सै अरमान बाला जी,

तुने जग में करी है ऊंची शान बाला जी,

देख दुनिया बड़ी है परेशान बाला जी,

नरसी धरता तेरा ध्यान अटकी तेरे में ही जान,

मित्तल करता गुणगान मन्ने अच्छा लगे से,

तेरे तन में है राम तेरे मन में है राम,

तन्ने कहना राम-राम मने अच्छा लागे से ॥


........................................................................................................
डमक डम डमरू रे बाजे (Damak Dam Damroo Re Baje)

डमक डम डमरू रे बाजे,
चन्द्रमा मस्तक पर साजे,

भीष्म द्वादशी पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार महाभारत युद्ध में अर्जुन ने भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या पर लिटा दिया था। उस समय सूर्य दक्षिणायन था। तब भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार करते हुए माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन प्राण त्याग दिए थे।

मोक्षदा एकादशी पर विष्णु जी का पूजन

प्रत्येक एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इसी प्रकार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली मोक्षदा एकादशी को मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने