मैं कितना अधम हूँ, ये तुम ही जानो (Main Kitna Adham Hu Ye Tum Hi Jano)

मैं कितना अधम हूँ,

ये तुम ही जानो,

मैं क्या चाहता हूँ,

ये तुम ही जानो,

मै कितना अधम हूँ,

ये तुम ही जान ॥


ना दीनता है ना भाव भक्ति,

ना कुछ भजन है ना आत्मशक्ति,

मैं क्या देखता हूँ,

ये तुम ही जानो,

मै कितना अधम हूँ,

ये तुम ही जानो ॥


दुनिया से मुझको फुर्सत ना मिलती,

तक़दीर की मेरी अटकन ना मिटती,

मैं क्या मांगता हूँ,

ये तुम ही जानो,

मै कितना अधम हूँ,

ये तुम ही जानो ॥


यही दर्द दिल में तड़पन है भारी,

तेरे दर पे आया आगे मर्जी तुम्हारी,

मैं पागल बना हूँ,

ये तुम ही जानो,

मै कितना अधम हूँ,

ये तुम ही जानो ॥


मैं कितना अधम हूँ,

ये तुम ही जानो,

मैं क्या चाहता हूँ,

ये तुम ही जानो,

मै कितना अधम हूँ,

ये तुम ही जानो ॥

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भगवान मेरी नैया, उस पार लगा देना(Bhagwan Meri Naiya Us Par Gaga Dena)

भगवान मेरी नैया,
उस पार लगा देना,

रुक्मिणी अष्टमी की कथा

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। देवी रुक्मिणी मां लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं और भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों में से एक थीं।

नवंबर में इस दिन रखा जाएगा प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं और उनके निमित्त प्रदोष व्रत रखते हैं।

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..: भजन (Ajaa Nand Ke Dulare)

आजाआ... ओओओ...
आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..

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