माँ शारदा भवानी, बैठी है देखो कैसे(Maa Sharda Bhawani Bethi Hai Dekho Kaise)

माँ शारदा भवानी,

बैठी है देखो कैसे,

मैया सजी है ऐसे,

दुल्हन बनी हो जैसे,

मां शारदा भवानी,

बैठी है देखो कैसे ॥


हाथो में चूड़ी चमके,

माथे में बिंदियां दमके,

कानो में बाली लटके,

बालो में गजरा महके,

लहराए केश ऐसे,

काली घटा के जैसे,

मैया सजी है ऐसे,

दुल्हन बनी हो जैसे,

मां शारदा भवानी,

बैठी है देखो कैसे ॥


हीरो जड़ी है नथनी,

सोने की पहने ककनी,

पाओ में पहने मुंदरी,

ओढे है लाल चुनरी,

चेहरा चमक रहा है,

पूनम के चाँद जैसे,

मैया सजी है ऐसे,

दुल्हन बनी हो जैसे,

मां शारदा भवानी,

बैठी है देखो कैसे ॥


पाओ में है महावल,

पायल है घुंघरू वाली,

आंखे है काली काली,

होठो पे लाल लाली,

माँ के नयन है ऐसे,

खिलते कमल हो जैसे,

मैया सजी है ऐसे,

दुल्हन बनी हो जैसे,

मां शारदा भवानी,

बैठी है देखो कैसे ॥


माँ शारदा भवानी,

बैठी है देखो कैसे,

मैया सजी है ऐसे,

दुल्हन बनी हो जैसे,

मां शारदा भवानी,

बैठी है देखो कैसे ॥

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भोला भाला तू अंजनी का लाला (Bhola Bhala Tu Anjani Ka Lala)

भोला भाला तू अंजनी का लाला,
है बजरंग बाला,

मां लक्ष्मी पूजा विधि

दीपावली, जिसे दीपोत्सव या महालक्ष्मी पूजन का पर्व भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति का सबसे पावन त्योहारों में से एक है। यह पर्व विशेषकर धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए ही मनाया जाता है।

वृन्दावन के ओ बांके बिहारी (Vrindavan Ke O Banke Bihari )

वृन्दावन के ओ बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ॥

भगवान राम और माता शबरी की भेंट

माता शबरी रामायण की एक महत्वपूर्ण पात्र हैं, जिन्होंने भगवान राम की भक्ति में अपना जीवन समर्पित किया था। शबरी ने भगवान राम और माता सीता की प्रतीक्षा में वर्षों तक वन में निवास किया था।

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