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कैसी लीला रचाई जी,
के हनुमत बालाजी,
कैसी लीला रचायी जी,
के बजरंग बालाजी ॥
खेल करत अंबर में निकल गए,
समझ के फल तुम सूरज निगल गये,
करी देवो ने विनती जी,
के बजरंग बालाजी,
कैसी लीला रचायी जी,
के बजरंग बालाजी ॥
दसकंधर किया हरण सिया का,
लंका में जा पता किया था,
तुमने लंका जलाई जी,
के बजरंग बालाजी,
कैसी लीला रचायी जी,
के बजरंग बालाजी ॥
लंका जला शांत की ज्वाला,
मछली पेट गर्भ तुम डाला,
की सूत से लड़ाई जी,
के बजरंग बालाजी,
कैसी लीला रचायी जी,
के बजरंग बालाजी ॥
शक्तिबाण लग्यो लक्ष्मण के,
संकट मे थे प्राण लखन के,
करी तुरत सहाई जी,
के बजरंग बालाजी,
कैसी लीला रचायी जी,
के बजरंग बालाजी ॥
अहिरावण ने की चतुराई,
राम लखन दोउ लिए चुराई,
ली बंद छुड़ाई जी,
के बजरंग बालाजी,
कैसी लीला रचायी जी,
के बजरंग बालाजी ॥
‘गीता’ भी है तेरी सेवक,
मेरी नैया के तुम केवट,
दो पार लगाई जी,
के बजरंग बालाजी,
कैसी लीला रचायी जी,
के बजरंग बालाजी ॥
कैसी लीला रचाई जी,
के हनुमत बालाजी,
कैसी लीला रचायी जी,
के बजरंग बालाजी ॥
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