कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना! (Kaise Jiun Main Radha Rani Tere Bina)

कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना,

मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना॥


मेरे पापों का कोई ठिकाना नहीं,

तेरी प्रीत क्या होती जाना नहीं,

शरण देदो मेरे अवगुण निहारे बिना॥

॥ कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना...॥


मोहे प्रीत की रीत सिखा दो प्रिया,

अपनी यादो में रोना सिखा दो प्रिया,

जीवन नीरस है अखिओं के तारे बिना॥

॥ कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना...॥


प्यारी पतितों की पतवार तुम ही तो हो,

दीन दुखिओं की आधार तुम्ही तो हो,

अब मैं जाऊं कहा तेरे द्वारे बिना॥

॥ कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना...॥


कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना,

मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना॥

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है मतवाला मेरा रखवाला (Hai Matwala Mera Rakhwala)

है मतवाला मेरा रखवाला,
लाल लंगोटे वाला,

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी (Ab Naa Banegi Too Phir Na Banegi)

अब ना बानी तो फिर ना बनेगी
नर तन बार बार नहीं मिलता

ऋषि पंचमी व्रत कथा (Rishi Panchami Vrat Katha)

श्री ऋषिपंचमी व्रत कथा (भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को किया जाने वाला व्रत) राजा सुताश्व ने कहा कि हे पितामह मुझे ऐसा व्रत बताइये जिससे समस्त पापों का नाश हो जाये।

वृंदावनी वेणू (Vrindavani Venu)

वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे ।
वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥

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