जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री (Janme Avadh Me Ram Mangal Gao Ri)

जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री

दो सबको ये पैगाम घर घर जाओ री

जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री


कौशल्या रानी को सब दो बधाई

आई रे आई घडी शुभ ये आई

मिलके चलो रघु धाम

संग मेरे आओ री

मिलके चलो रघु धाम

संग मेरे आओ री


जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री

दो सबको ये पैगाम घर घर जाओ री


राम लला के दर्शन करलो

पग पंकज पे माथा धरलो

पावन है इनका नाम

पल पल ध्याओ री

पावन है इनका नाम

पल पल ध्याओ री


जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री

दो सबको ये पैगाम घर घर जाओ री


दशरथ के अंगना बजी शहनाई

दुल्हन के जैसी अयोध्या सजाई

खुशियों की है ये शाम

दीप जलाओ री

खुशियों की है ये शाम

दीप जलाओ री


जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री

दो सबको ये पैगाम घर घर जाओ री

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क्यों मनाते हैं सकट चौथ

सकट चौथ व्रत करने से भगवान गणेश जी प्रसन्न होते हैं और सभी प्रकार के दुखों को हर लेते हैं। इस दिन माताएं अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करना बेहद आवश्यक माना गया है।

अहोई अष्टमी का महत्व और मुहूर्त

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। यह व्रत माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन माताएं अपने पुत्रों की कुशलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए निर्जला व्रत करती हैं।

गुरुवार को किन मंत्रों का जाप करें?

सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन श्रद्धा से पूजा, व्रत और दान करने से जीवन की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर बन रहे मंगलकारी योग

सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की आराधना कर सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं।

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