चली चली रे पालकी श्री राम की (Chali Chali Re Palki Shree Ram Ki)

चली चली रे,

चली चली रे,

चली चली रे पालकी श्री राम की,

जय बोलो भक्तो वीर हनुमान की ॥


भक्तों के ये काज संवारे,

कर देते हैं वारे न्यारे,

श्री राम जी के साथ माता जानकी,

जय बोलो भक्तों वीर हनुमान की,

चली चली रे पालकी श्रीं राम की,

जय बोलो भैया वीर हनुमान की ॥


इनका हर साल मेला लगता,

बजरंगी का रूप है सजता,

वेद शास्त्रों में महिमा इनके नाम की,

जय बोलो भक्तों वीर हनुमान की,

चली चली रे पालकी श्रीं राम की,

जय बोलो भैया वीर हनुमान की ॥


इनको बस इक अर्जी लगती,

कृपा भक्तों पे करती शक्ति,

‘देवदत्त’ देवे बधाई गुणगान की,

जय बोलो भक्तों वीर हनुमान की,

चली चली रे पालकी श्रीं राम की,

जय बोलो भैया वीर हनुमान की ॥


चली चली रे,

चली चली रे,

चली चली रे पालकी श्री राम की,

जय बोलो भक्तो वीर हनुमान की ॥

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मनाओ जी गणेश भक्तो(Manao Ji Ganesh Bhakto)

गौरा माता दी अख दा तारा,
शिव शंकर दा राजदुलारा,

बिगड़ी मेरी बना दे ओ शेरो वाली मैय्या

सदा पापी से पापी को भी तुम, माँ, भव-सिंधु तारी हो फँसी मझधार में नैय्या को भी पल में उबारी हो

शेरावाली की नज़र जिसपे पड़ने लगी (Sherawali Ki Nazar Jispe Padne Lagi)

शेरावाली की नज़र जिसपे पड़ने लगी,
जिसपे पड़ने लगी,

लाल लाल चुनरी सितारो वाली (Laal Laal Chunari Sitaron Wali)

लाल लाल चुनरी सितारों वाली,
सितारो वाली,

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