भक्ति और शक्ति के दाता, रामचरण से जिनका नाता (Bhakti Aur Shakti Ke Data Ram Charan Se Jinka Nata)

भक्ति और शक्ति के दाता,

रामचरण से जिनका नाता,

म्हारा बजरंगबली,

म्हारा बजरंगबली ॥


राम बिना जिनको कुछ भी ना ध्यावे,

राम में हरदम जो ध्यान लगावे,

राम करे जो भी बजरंग कराएं – २,

पर ना कभी दिल में अभिमान लाए,

म्हारा बजरंगबली,

म्हारा बजरंगबली ॥


जिसके हो सर प्रभु कर हमेशा,

ऐसा ना सेवक अभी तक है देखा,

प्राण ना प्यारे प्रभु जिनको प्यारे- २,

ऐसे ही है यह पवन के दुलारे,

म्हारा बजरंगबली,

म्हारा बजरंगबली ॥


रावण को ललकारा लंका में जाकर,

लक्ष्मण बचाए थे पर्वत उठाकर,

रामजी जिनको भरत सम बताएं,

काल भी है जिनसे आंख चुराए,

म्हारा बजरंगबली,

म्हारा बजरंगबली ॥


राम की भक्ति का मार्ग बता दो,

बाधा अनेकों इन्हें तुम हटा दो,

राम से कैसे मिलन हो हमारा,

श्याम कहे कर दो कारज हमारा,

म्हारा बजरंगबली,

म्हारा बजरंगबली ॥


भक्ति और शक्ति के दाता,

रामचरण से जिनका नाता,

म्हारा बजरंगबली,

म्हारा बजरंगबली ॥

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श्रीराम और होली की कथा

होली का त्योहार सिर्फ द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसका संबंध त्रेतायुग और भगवान श्रीराम से भी गहरा है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में भी होली मनाई जाती थी, लेकिन तब इसका रूप आज से थोड़ा अलग था। ये सिर्फ रंगों का खेल नहीं था, बल्कि सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा हुआ एक अनोखा त्योहार था।

बंसी बजाय गयो श्याम (Bansi Bajaye Gayo Shyam)

बंसी बजाय गयो श्याम,
मोसे नैना मिलाय के,

महामंत्र शिवजी का, हमें प्यारा लागे - भजन (Mahamantra Shivji Ka Hame Pyara Lage)

महामंत्र शिवजी का,
हमें प्यारा लागे ॥

भीष्म अष्टमी कब है, शुभ मुहूर्त एवं योग

माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी मनाई जाती है। कहा जाता है कि इसी दिन बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याग किए थे। इसलिए सनातन धर्म में यह तिथि अत्यंत शुभ मानी गई है।

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