बााबा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी (Baba Nene Chaliyo Hamaro Apan Nagari)

बााबा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी,

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

अपन नगरी हो झारखण्ड डगरी

बबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी

अँगना बहारब बाबा, घरवा बहारब

अँगना बहारब बाबा, घरवा बहारब

औरो बहारब अहां के डेहरी बाबा

औरो बहारब अहां के डेहरी

बा बा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी,

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी


अहां के नगर में बाबा गंगा नहायब

अहां के नगर में बाबा गंगा नहायब

जल भरी आनब भरी गगरी

बाबा जल भरी आनब भरी गगरी

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,


कार्तिक गणपति गोद खिलायब

कार्तिक गणपति गोद खिलायब

पीसब भांग रगड़ी रगड़ी बाबा

पीसब भांग रगड़ी रगड़ी

बाब लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी


सांझ सवेरे बाबा झांकी निहारब

जीवन सफल होयत हमरी

बाबा जीवन सफल होयत हमरी

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

अपन नगरी हो झारखण्ड डगरी

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,


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कन्हैया ने जब पहली बार बजाई मुरली, सारी सृष्टि में आनंद की लहर दौड़ी

मुरलीधर, मुरली बजैया, बंसीधर, बंसी बजैया, बंसीवाला भगवान श्रीकृष्ण को इन नामों से भी जाना जाता है। इन नामों के होने की वजह है कि भगवान को बंसी यानी मुरली बहुत प्रिय है। श्रीकृष्ण मुरली बजाते भी उतना ही शानदार हैं।

हमें गुरुदेव तेरा सहारा न मिलता (Hame Gurudev Tera Sahara Na Milata)

हमें गुरुदेव तेरा सहारा न मिलता ।
ये जीवन हमारा दुबारा न खिलता ॥

प्रदोष व्रत पर क्या करें या न करें

प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के लिए किया जाता है। यह व्रत प्रत्येक महीने में दो बार, त्रयोदशी तिथि को (स्नान, दिन और रात के समय के अनुसार) किया जाता है, एक बार शुक्ल पक्ष में और दूसरी बार कृष्ण पक्ष में।

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी (Darshan Do Ghansyam Nath Mori Akhiyan Pyasi Re)

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,
अँखियाँ प्यासी रे ।

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