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माता महादेवी है नाम, विराजी दशरमन में (Mata Mahadevi Hai Naam Viraji Dasharman Main)

माता महादेवी है नाम,

विराजी दशरमन में,

सेवा में पंडा हज़ार,

माई की मढुलिया में,

माता महादेवी हैं नाम,

विराजी दशरमन में ॥


आप विराजी सील में जाकर,

नगरी बसा दई नीचे आकर,

सेवा में सब नर नार,हए,

माई की मढुलिया में,

माता महादेवी हैं नाम,

विराजी दशरमन में ॥


नीचे विराजे राम लला जी,

संग में उनके सीता माँ भी,

सेवा में हनुमत लाल,

माई की मढुलिया में,

माता महादेवी हैं नाम,

विराजी दशरमन में ॥


नवराते में बोये जवारे,

द्वार तुम्हारे काली नाचे,

करते सब जय जयकार,

माई की मढुलिया में,

माता महादेवी हैं नाम,

विराजी दशरमन में ॥


भक्तों तुम भी अरज लगा लो,

अपने बिगड़े काज सवारो,

बनते हर बिगड़े काज,

माई की मढुलिया में,

माता महादेवी हैं नाम,

विराजी दशरमन में ॥


माता महादेवी है नाम,

विराजी दशरमन में,

सेवा में पंडा हज़ार,

माई की मढुलिया में,

माता महादेवी हैं नाम,

विराजी दशरमन में ॥

एकादशी पूजन विधि (Ekadashi Poojan Vidhi )

एकादशी पूजन में विशेष तौर से भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है इस दिन पवित्र नदी या तालाब या कुआं में स्नान करके व्रत को धारण करना चाहिए

नवंबर में इस दिन रखा जाएगा प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं और उनके निमित्त प्रदोष व्रत रखते हैं।

कुंभ संक्रांति पूजा-विधि और नियम

जिस तरह सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश से मकर संक्रांति मनाई जाती है। उसी तरह जिस दिन सूर्यदेव कुंभ राशि में प्रवेश कर सकते हैं, वह दिन कुंभ संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

षटतिला एकादशी पर तिल के उपाय

षटतिला एकादशी माघ महीने में पड़ती है और इस साल यह तिथि 25 जनवरी को है। षटतिला का अर्थ ही छह तिल होता है। इसलिए, इस एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है।

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