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ममतामयी मां हे जगदम्बे (Mamatamayi Ma He Jagadambe)

ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)

भाग्य उदय हो जाएं हमारे, अपने दरस दिखा जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)


देर करो न आज भवानी, सफल करो माता जिंदगानी।

देर करो न आज भवानी, सफल करो माता जिंदगानी।

मेरे मन को निर्मल कर दो, भक्ति भाव जगा जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)


तरस रहे हैं नैन हमारे, बाठ निहारत सांझ सकारे।

तरस रहे हैं नैन हमारे, बाठ निहारत सांझ सकारे।

दीप द्वारे रख में बैठी, अपने ज्योत जला जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)


ये बेनाम शरण तेरी आई, हम पर भी मां हो करुणाई।

ये बेनाम शरण तेरी आई, हम पर भी मां हो करुणाई।

आँगन बिन माता लगे सूना, अमृत रस बरसा जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)

ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।

(ममतामयी मां हे जगदम्बे, मेरे घर भी आ जाओ।)

भाग्य उदय हो जाएं हमारे, अपने दरस दिखा जाओ।


ओढ़ो जी ओढ़ो दादी, म्हारी भी चुनरिया (Odhoji Odho Dadi Mhari Bhi Chunariya)

ओढ़ो जी ओढ़ो दादी,
म्हारी भी चुनरिया,

मन में है विश्वास अगर जो श्याम सहारा मिलता है(Man Mein Hai Vishwas Agar Jo Shyam Sahara Milta Hai)

मन में है विश्वास अगर जो,
श्याम सहारा मिलता है,

तेरे दरबार में मैय्या खुशी मिलती है

तेरी छाया मे, तेरे चरणों में,
मगन हो बैठूं, तेरे भक्तों में॥

होली पर गुजिया क्यों बनाई जाती है

हर घर में होली के मौके पर गुजिया बनाई और खाई जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि होली पर गुजिया बनाने की परंपरा क्यों है? इसके पीछे एक दिलचस्प पौराणिक कथा और ऐतिहासिक महत्व छिपा हुआ है। तो आइए जानते हैं कि होली पर गुजिया क्यों बनाई जाती है और इसके पीछे की कहानियां क्या हैं।