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बैठी हो माँ सामने, कर सोलह श्रृंगार (Baithi Ho Maa Samne Kar Solah Shringar)

बैठी हो माँ सामने,

कर सोलह श्रृंगार,

तू करुणा की है मूरत,

और ममता का भण्डार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥


निरख रही हो हम भक्तों को,

बड़े प्यार से जगजननी,

इसी तरह हम भक्तों को भी,

तेरी ही सेवा करनी,

तू हरदम देती रहना,

हमको माँ प्यार दुलार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥


तेरी ममता की छाया में,

इसी तरह हम पले बढ़े,

तेरी किरपा से ही माता,

हम अपने पैरो पे खड़े,

तेरे बच्चों को देने में,

तू करती नहीं इन्कार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥


हम बच्चों पर हरदम मैया,

आशीर्वाद तुम्हारा हो,

‘हर्ष’ कहे माँ शेरोवाली,

हरपल साथ तुम्हारा हो,

तू हाथ दया का रखना,

सांचा तेरा दरबार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥


बैठी हो माँ सामने,

कर सोलह श्रृंगार,

तू करुणा की है मूरत,

और ममता का भण्डार,

बैठी हो मां सामने,

कर सोलह श्रृंगार ॥

जिसने मरना सीखा लिया है (Jisane Marana Seekh Liya Hai)

जिसने मरना सीखा लिया है,
जीने का अधिकार उसी को ।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा का विधान है। इसी लिए विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता गणेश जी को समर्पित गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि का बनी रहती है।

चित्रगुप्त भगवान की पूजा कैसे करें?

भगवान चित्रगुप्त हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता हैं। उन्हें कर्मों का लेखाकार माना जाता है। वे सभी मनुष्यों के अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं और मृत्यु के बाद व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

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